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हमारे बारे में

 
 
  (ऊपर) बनवासी सेवा आश्रम का मुख्य भवन, तथा (नीचे) आश्रम को इंगित करते हुए एक चिह्न
 
   

बनवासी सेवा आश्रम की स्थापना 1954 में उस समय हुई जब इसका प्राथमिक कार्य क्षेत्र - दक्षिण सोनभद्र -  अकाल को झेल रहा था। इसकी स्थापना का श्रेय तत्कालीन मुख्य मंत्री, पं . गोविन्द वल्लभ पन्त , को जाता है जिनका मानना था कि आदिवासियों का विकास करने के लिए शोध तथा कार्य की आवश्यकता है। उन्होंने आश्रम के लिए 250 एकड़ वन भूमि दान में दी। इसके संस्थापक सदस्य अनुभवी सामाजिक कार्यकर्ता थे। उनमें से एक श्री रघुनाथ कौल वर्त्तमान में इसके अध्यक्ष हैं।

वर्ष 1967 तक उत्तर प्रदेश गाँधी स्मारक निधि गतिविधियों तथा व्यय का वहन करता रहा। इसके बाद सर्व सेवा संघ ने कार्य तथा व्यय के एक भाग का वहन करना प्रारंभ कर दिया। आश्रम के सचिव के रूप में प्रेमभाई ने 1973 में पूरी जिम्मेवारी संभाली।

लाभार्थियों के अपने विकास में उनकी भागीदारी के लिए आश्रम ने ग्रामस्वराज्य संगठनों को प्रोत्साहित किया है। ग्रामीण समुदाय को अपने जीवन निर्वहन के लिए तथा मूलभूत सेवाओ की उपलब्धता के लिए चिंता करनी ही होगी। इसे गाँव में ही पंचायतो तथा अन्य एजेंसियों की सहायता से संसाधनों को जुटाना होगा। आश्रम अपने कार्यों का नियोजन तथा क्रियान्वन लाभार्थियों के साथ करता है। यह आर्थिक सहायता केवल अत्यंत निर्धन योग्य लोगों, जिनमें आदिवासी, अनुसूचित जाति तथा पिछ्डे़ वर्ग के लोग सम्मिलित हैं, को देता है तथा लोगों को सहायता की राशि किश्तों में चुकानी होती है। लेकिन तकनीकी जानकारी तथा सेवाएँ सभी के लिए उपलब्ध हैं।

लाभार्थी समुदाय से नजदीकी संपर्क बनाये रखने तथा नियोजित गतिविधियों के प्रबंधन में क्षमता बनाये रखने के लिए आश्रम ने त्रिस्तरीय संरचना का विकास किया है :

  • आश्रम स्तर पर विकास कमेटी जिसमें विभागों का प्रतिनिधित्व है
  • क्षेत्र स्तर पर ग्राम विकास केंद्र
  • 3-4 गाँव के स्तर पर विकास मंच

ग्रामस्वराज्य संगठन में लोगों का सभी स्तरों पर प्रतिनिधित्व होता है। इसकी मूल इकाई ग्राम स्तर पर ग्रामस्वराज्य सभा है। इस सभा में गाँव के सभी परिवारों के वयस्क सम्मिलित होते हैं।

वर्तमान में आश्रम में 10 विभाग हैं - ग्राम निर्माण, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, खादी तथा ग्रामोद्योग, कृषि, पशु पालन, स्वास्थ्य, पर्यावरण, अन्य स्वयंसेवी समूहों को सहयोग। इसके अतिरिक्त 13 ग्राम विकास केंद्र तथा 80 विकास मंच हैं।

बनवासी सेवा आश्रम ने अपने कार्य की शुरुआत अनुभवी सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ की थी तथा बाद में कुछ तकनीकी रूप से प्रशिक्षित लोगों को कार्यकर्ताओं तथा सहयोगियों के रूप में नियुक्त किया था। इन्होंने बहुत सारे स्थानीय लोगों को विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण प्रदान किए।वर्तमान  (अप्रैल 2009) में आश्रम में 172 कार्यकर्ता हैं। इनमें से 121 स्थानीय हैं। इन्हें जीवन यापन भत्ता मूल सुविधाएं मिलती हैं। कार्यकर्ताओं में 22 महिलाएं है तथा इनमें से तीन प्रशासकीय पदों पर हैं।

कर्मचारियों को 194 अंशकालिक कार्यकर्ताओं जिनमें 58 पुरुष तथा 136 महिलाएं हैं से सहयोग मिलता है। कुल मिलकर 160 स्वयंसेवी हैं जो हमारे जागरूकता अभियानों में भाग लेते हैं। इन लोगों को केवल भत्ता मिलता है। ग्रामस्वराज्य सभा कमेटी संख्या 465 अपने आप कार्य करती है। इसे केवल आवश्यकतानुसार रजिस्टर आदि मिलते हैं।

अब तक पहचानी गयी समस्यायें तथा गतिविधियाँ निम्न हैं :

  • भोजन तथा जल की अल्प उपलब्धता की समस्या
  • साहूकारों की दासता के कारण
  • बाहरी व्यक्तियों तथा पुलिस का डर
  • मूल अवसंरचनात्मक सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, विद्युत, यातायात के साधनों, आदि, का अभाव
  • ग्रामोद्योगों के क्षेत्र में विद्यमान रोजगार के अवसर
  • भू अभिलेखों तथा भू अधिकारों में भ्रम
  • उद्योगों से विस्थापित लोगों के अधिकार
  • महिला एवं विकास
  • पर्यावरणीय प्रदूषण

सोनभद्र जिले में अब तक क्रियान्वित विकासात्मक गतिविधियों में सम्मिलित हैं :

  • जल संरक्षण, भूमि तथा मृदा विकास
  • संपूर्ण ग्राम विकास श्रेणी
  • क्राफ्ट तथा विकासात्मक गतिविधियों के लिए आवश्यक सेवाओ के लिए रोजगार उन्मुख प्रशिक्षु प्रशिक्षण
  • ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा
  • महिला विकास
  • ग्रामीण हकदारी
  • सर्वोच्च न्यायालय में भू अधिकारों, विस्थापितों तथा बंधुआ मजदूरों के अधिकारों के लिए जनहित याचिका
  • दक्षिणी सोनभद्र में पर्यावरणीय प्रदूषण की समस्या का अध्ययन तथा प्रस्तुतीकरण
  • किशोरों तथा युवाओं का जीवन उन्मुखीकरण

विभिन्न योजनाओं के अर्न्तगत स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से सीख का प्रचार प्रसार :

  • ग्रामीण हकदारी एवं कानूनी सहायता कार्यक्रम
  • उभरते हुए स्वयं सेवकों को वित्तीय सहयोग तथा निर्देशन
  • संपूर्ण साक्षरता अभियान
  • नागरिक सद्भावना मंच
  • उत्तराखंड के चार विकास खंडों के लिए सर्वेक्षण तथा विकास नियोजन
  • आपदाओं के समय राहत तथा पुनर्वास