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| मिशन एवं उद्देश्य | उपलब्धियां | संगठनात्मक संरचना |
 

उपलब्धियां

 
 
  कार्यक्षेत्र में ग्रामस्वराज्य सम्मलेन में सर्वोदय नेता जयप्रकाश नारायण

गत 50 वर्षों में बनवासी सेवा आश्रम की मुख्य उपलब्धियां निम्न रही हैं:

1. सोनभद्र जिले के चार दक्षिणी विकास खण्डों के सभी 400 गांवों के निवासियों से प्रगाढ़ संबंध विकसित करना।

2. त्रिस्तरीय जन संगठनों का गठन करना। लोगों के त्रिस्तरीय ग्रामस्वराज्य संगठन का गठन किया गया है ताकि ग्राम स्तर, ग्राम निर्माण केन्द्र तथा आश्रम स्तर पर सामुदायिक विकास के लिए लोगों की पहलों को प्रोत्साहित किया जा सके। कुल मिलाकर 445 गांवों में ग्रामस्वाज्य सभा का गठन किया गया है ताकि ग्राम कोष का विकास किया जा सके; गांवों के झगड़ों का गांवों में ही समाधान किया जा सके; सामाजिक सुधार प्रारंभ किए जा सकें; महिलाओं की समता, विकास तथा सामुदायिक समरसता को प्रोत्साहित किया जा सके; विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वन में जिम्मेवारी की हिस्सेदारी की जा सके ताकि वे अपने अधिकारों के लिए स्वयं लड़ सकें एवं भ्रष्टाचार रोका जा सके।

3. सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना। आश्रम ने लोगों की सहायता निम्न प्राप्त करने में की है:

क.       1,500 बंधुआ मजदूरों तथा अन्य लोगों तथा/या वन विभाग के कब्जे से 1,000 एकड़ भूमि का छुड़ाना
ख. दक्षिणी सोनभद्र के गांवों में 50,000 परिवारों को प्रति परिवार 5-15 एकड़ की दर से कुल 2,75,000 एकड़ भूमि का हक
ग.       वन उपज के दोहन में शोषण का अंत

4. सामाजिक कल्याण का प्रोत्साहन

 
  कक्षा का एक दृश्य

क. शिक्षा

  • सात विद्यालचों का संचालन: पांच वर्षों में 9,389 लाभार्थी बच्चों ने पांचवीं, आठवीं तथा दसवीं कक्षा उत्तीर्ण की तथा वे आगे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
  • पांच वर्षों में 8,927 लाभार्थी बच्चों ने प्राथमिक शिक्षा पूर्ण की
  • प्रौढ़ शिक्षा के लाभार्थी - 1,07,500 प्रौढ़
  • चल पुस्तकालय सेवा - 25,000 लाभार्थी

ख. स्वास्थ्य तथा चिकित्सा सेवा

  • स्वास्थ्य तथा परिवार नियोजन शिक्षा: 300 गांवों के लोगों को 295 स्वास्थ्य मित्रों के माध्यम से लाभ
  • एग्रीन्डस क्लीनिक तथा 10 स्वास्थ्य केन्द्रों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं: प्रतिवर्ष लगभग 30,000 रोगियों को लाभ
  • ग्रामवासियों को त्रिस्तरीय ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में प्रशिक्षण:
    • ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य मित्र
    • ग्राम विकास केन्द्र पर ग्राम चिकित्सक
    • एग्रीन्डस क्लीनिक पर ग्राम चिकित्सक

ग. महिला समता तथा विकास
इसे जागरूकता के प्रसार, कार्यात्मक शिक्षा सुविधा प्रदान करने तथा नेतृत्व क्षमता के विकास के द्वारा किया गया। इससे 300 गांवों की महिलाओं को लाभ पंहुचा। लगभग 170 प्रशिक्षित ग्राम सखियां क्षेत्र में कार्य कर रही हैं।

घ. पेयजल सुविधा

  • 160 हैण्ड पम्पों की संस्थापना
  • 1.800 कुंओं को खोदा/पुनरुध्दार किया गया

च. शौचालय

  • 126 शौचालयों का निर्माण किया गया

छ. बायोगैस संयंत्र

  • 11 बायोगैस संयंत्रों की संस्थापना की गई

5. विवादों का शांतिपूर्ण समाधान. 400 गांवों में औसतन 2,700 विवादों का प्रतिवर्ष समाधान किया जा रहा है।

6. रिवाल्विंग फण्ड का संचालन

क. ग्राम स्तर पर रिवाल्विंग फण्ड का गठन किया गया है तथा इसका संचालन ग्राम स्वराज कमेटी द्वारा किया जा रहा है।
ख. इसका गठन आश्रम स्तर पर भी किया गया है तथा इसका संचालन केन्द्रीय ग्रामस्वराज्य कमेटी द्वारा आर्थिक विकास के लिए किया जा रहा है।

7. कृषि, वानिकी, डेयरी विकास तथा खादी एवं ग्रामोद्योग का प्रोत्साहन

 
  आश्रम के हस्तक्षेपों कारण धान जैसी फसलें अब दक्षिणी सोनभद्र जिले में उगाई जा रही हैं

क. कृषि: 1411 मृदा बंध, 1,110 कूप, 372 उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण। इससे 21,650 एकड़ भूमि पर सिंचाई संभव हो सकी। 23,390 एकड़ भूमि पर मेड़बंदी की गई।
ख. वानिकी: जलौनी लकड़ी, चारे, फल, इमारती लकड़ी की 46,75,000 पौधों का रोपण। 34 नर्सरियों की स्थापना।
ग. डेयरी: एक संकर गायों की डेयरी, 6 सांड सेवा केन्द्र, 200 दुधारु पशुओं का वितरण।
घ. खादी के उपयोग का प्रोत्साहन: सूती, रेशमी एवं ऊनी खादी के उत्पादन तथा कीट पालन को प्रोत्साहन। साबुन, तेल, मसाले, चमड़े की वस्तुएं, बढ़ईगीरी, लोहारी, ईंट निर्माण, जैसे ग्रामोद्योग का विकास। खादी एवं ग्रामोद्योग से लगभग 80 लाख रु. प्रतिवर्ष की आय होती है।

8. सामाजिक कार्य

क. युवाओं को सामाजिका कार्य में अनुभव के माध्यम से प्रशिक्षित करना, तथा
ख. 136 कार्यशील समूहों को प्रारंभिक चरणों में वित्तीय तथा अन्य सहयोग प्रदान करना

9. पर्यावरण संरक्षण कार्य

आश्रम ने इस मुद्दे पर लगातार संवाद तथा सेमिनारों एवं विभिन्न मुद्दों पर जन सुनवाइयों का आयोजन किया है। सिंगरौली क्षेत्र में आश्रम 1997 से पर्यावरणीय गुणवत्ता का अनुश्रवण कर रहा है। वर्तमान में हम 9 स्थानों पर वायु, 24 स्थानों पर सतही जल एवं 13 स्थानों पर भूजल की गुणवत्ता का अनुश्रवण केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लिए कर रहे हैं।