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हाईब्रिड के उत्पादन और दाम में है भारी अन्तर - पालेकर
 

लिलासी (सोनभद्र) पूरी तरह रासायनिक खाद और कीटनाशकों के भरोसे उगाई जाने वाली हाईब्रिड फसल हर तरह से नुकसानदायक है एवं प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाली है। यह उत्पादन में तो ज्यादा दिखती है लेकिन देशी धान के बराबर चावल नहीं होता है। हमें यह तय करना है कि हमें क्या चाहिए। उक्तबातें जाने माने कृषि विशेषज्ञ लेखक सुभाष पालेकर ने मंगलवार कोदेर शाम तीन दिवसीय प्राकृतिक कृषि संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहीं।

उन्होंने बताया कि हाईब्रिड धान से प्रति कुंतल 60 प्रतिशत चावल, शकर प्रजाति से प्रति कुंतल 50 प्रतिशत तथा देशी धान से 80 प्रतिशत चावल मिलता है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती ही सर्वोत्तम खेती है बस जरूरत इस बात की है कि हम जीवामृत का प्रयोग मानक के अनुसार करें।

उन्होंने दावा किया कि गन्ने की फसल एक बार लगाकर साल भर तक उत्पादित किया जा सकता है। खेत में मेड़, मेड़ पर पेड़ लगाने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि 40 वर्ष का एक वॄक्ष 6 लीटर पानी वायु मण्डल से खींचता है और 200 लीटर पानी नमी के रूप में छोड़ता है। उन्होंने गेहूँ के साथ गेंदा, लूबिया, दलहनी फसल बोने की सलाह देते हुए कहा कि इससे उत्पादन बढ़ेगा। बुधवार को संगोष्ठी के समापन अवसर पर आश्रम की मुखिया डॉ. रागिनी बहन ने कहा कि दक्षिणांचल का पूरा क्षेत्र प्राकृतिक खेती पर निर्भर था। उन्हें पता था कि किस खेत में कौन की फसल बोई जानी चाहिए। उन्होंने इन जानकारियों को एकत्रित करने का आवहान करते हुए कहा कि सवां धान से ज्यादा पौष्टिक है, लेकिन इस लालच में पड़कर सब छोड़ दिये हैं और इसी लालच के चलते हम भूजल और भू-सम्पदा को दोहन कर रहे हैं। हमें लौटकर प्राकृतिक खेती की ओर आना होगा तभी हमें समाधान मिलेगा।  किसान स्वयं में वैज्ञानिक भी है उसे अनुभव से सीखना चाहिए।

पूर्व जिला जज प्रेम सिंह ने कहा कि आयात किया हुआ हाईब्रिड बीज पूरी तरह दवा पर निर्भर है। इससे स्वास्थ्य और किसान का खेत दोनों खराब हो रहा है। गोष्ठी का संचालन करते हुए शुभा बहन ने कहा कि निरंतर अध्ययन चिंतन से हमें आगे बढ़ना होगा।  तभी हमें सफलता मिलेगी। मणिपुर, उड़ीसा, झारखण्ड, बंगाल व उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिले से आये किसान प्राकृतिक खेती करने का प्रणकरा बुधवार को घर लौटे। इस दौरान प्रमिला, वी.सी.शर्मा, दिलीप महतो, महेन्द्र शर्मा, प्रमिला महाराणा, सारंग, धुर्वानन्द शरण, ओंकार भूषण, लालमणि कनौजिया, रवीन्द्र दुबे, राजेश चन्द्र त्रिपाठी, विमल, अजय झा, बिरझन गौड़, रामनरेश यादव, राधे कृष्ण कनौजिया, रमेश यादव आदि उपस्थित रहे।

(यूनाइटेड भारत, 10 सितम्बर 2009 )

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