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समाचार पत्रों से
पंत, धीरेन्द्र दा और कर्मयोगी प्रेमभाई की जयंती मनी
 

म्योरपुर (सोनभद्र) अतीत हमारी विरासत है और उसे याद कर हम आगे ही राह तय करते हैं। इस राह पर बहुत लोग चलते हैं पर महान वही बनता है जो अपना सर्वस्व त्याग कर समाज के दबे लोगों के लिए काम करते हैं। कैलाश पर्वत की ऊँचाई तक पहुंचना है तो खुद को विषपान कर दूसरों को अमृत कराना होगा। उक्त बातें वरिष्ठ साहित्यकार और आश्रम के ट्रस्टी मंडल के सदस्य अजय शेखर ने बुधवार को तीन महान विभूतियों के जन्म दिवस पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए कही।

प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत, शिल्पकार धीरेन्द्र मजुमदार तथा कर्मयोगी प्रेमभाई के जन्मदिन पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री शेखर ने कहा कि हमें आज जरूरत है कि प्रेम भाई ने जिस निष्ठा से काम किया और सादगी को अपने आचरण में उतारा उसे हम भी उतारने का संकल्प लें। पूर्व जिला जज वायोवृध्द प्रेम सिंह ने कहा कि प्रेमभाई का व्यक्तित्व ऐसा था कि लोग प्रभावित हो जाते थे। कर्म और आचरण से महान होने के बाद भी उनका जीवन पूरी तरह सादगी से भरा था। उन्होंने यहां के लिए बहुत कुछ ही देश भर के सैकड़ों युवाओं को समाज में काम करने के लिए जोड़ा। उन्होंने कहा कि आज तो लोकतं? ऐसा है जहां महान बनाने की परम्परा बन गई है जहां त्याग है न सादगी। श्री सिंह ने आह्मन किया कि समाज के लोग न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति कर जीवन जिएं और बचे धन और समय को समाज में लगाए। डाँ. रागिनी बहन ने कहा कि आश्रम तीनों महापुरूषों का ऋणी है। इन्हीं के प्रेरणा और प्रेम भाई के कर्मो से संस्था बढ़ी है और क्षेत्र में काम चल रहा है। संयुक्त मंत्री शुभा बहन ने धीरेन्द्र दा के पूर्वजों की दर्द भरी कहानी सुना कर कई के आंखों में पानी भर दिया। बताया कि धीरेन्द्र दा के दादी को गर्भावस्था में जंगल में छोड़ दिया गया था।

इस दौरान रविचन्द्र दूबे, राजेश चंद्र त्रिपाठी, विमल भाई ने भी अपने विचार रखे और प्रेम भाई की मूर्ति स्थापित कराने का आग्रह किया। इसके पूर्व प्रेम भाई के समाधि पर सर्व धर्म प्रार्थना का आयोजन किया गया। आश्रम के फरीपान, बघाडू, केवाल, जुगैल, पिपरहा, चेतवा, बकुलिया समेत 13 केन्द्रों पर इन तीनों विभूतियों का जन्मदिन मनाया गया। इस दौरान प्रेम सिंह के सहयोग से मिष्ठान वितरण किया गया। कार्यक्रम में परमेश्वर दयाल, हरिप्रसाद कनौजिया, राधेकृष्ण, रश्मि सिंह, माया बहन, डा. ब्रहमजीत सिंह, जगत भाई, शुभा, प्रेम, दिवाकर शर्मा, लालमन, सर्वजीत सिंह, शिवप्रसाद समेत सैकड़ों स्कूली छात्र-छात्राएं और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। संचालन शिवशंकर सिंह ने किया।

(अमर उजाला, 11 सितम्बर 2009 )

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