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बच्चों के लिए शिक्षा

 
 
  (ऊपर) एक शिक्षा केंद्र के बाहर बच्चे, तथा (नीचे) एक अन्य स्कूल में कक्षा में बच्चे
 

बनवासी सेवा आश्रम ने अपने शिक्षा कार्यक्रम की शुरुआत जागरूकता प्रसार से की तथा शीघ्र ही साक्षरता कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। वर्ष 1967-68 में प्रौढ़ शिक्षा तथा चल पुस्तकालय कार्यक्रम प्रारंभ किए गए। बाल शिक्षा कार्यक्रम 1968 में एक विद्यालय की स्थापना के साथ प्रारंभ किया गया। शिक्षा से वंचित तथा कार्यशील बच्चों के लिए अनौपचारिक शिक्षा को 1977 में प्रारंभ किया गया। महिला शिक्षण तथा साक्षरता अभियान को 1990 में प्रारंभ किया गया तथा बाद में विज्ञान तथा परिवार शिक्षा कार्यक्रम जोड़े गए।

वर्ष 1990 से 1996 तक 212 गांवों में संपूर्ण साक्षरता अभियान को चलाया गया। संपूर्ण साक्षरता अभियान में महिलाओं तथा पुरुषों की साक्षरता, साक्षरों की सतत शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, 5 से 14 वर्ष के बच्चों की अनौपचारिक शिक्षा तथा शासकीय विद्यालयों का नियमितीकरण सम्मिलित थे। जन शिक्षण निलयम के अभिप्रेरकों एवं ग्राम सखियों को संपूर्ण साक्षरता अभियान में क्रमश: 1990 तथा 1993 में संबध्द किया गया। परिणामस्वरूप जिन गांवों में संपूर्ण साक्षरता अभियान चलाय गया उनमें साक्षरता दर 75.46 प्रतिशत तक पंहुच गई तथा लोगों की बच्चों की शिक्षा में रुचि बढ़ गई। वर्तमान में प्रौढ़ साक्षरता तथा वाचनालय जन समुदाय के योगदान से चल रहे हैं।

पांच से 14 वर्ष के आयु समूह के बच्चों के लिए दो प्रकार के अनौपचारिक शिक्षण केन्द्र संचालित किए जा रहे हैं। पांच से आठ वर्ष के बच्चों के लिए 'बाल मंदिर' संचालित किए जा रहे हैं तथा नौ से 14 वर्ष के कार्यशील बच्चों के लिए 'ग्रामीण शालाएं' संचालित की जा रही हैं। ये केन्द्र मांग आधारित हैं तथा इनका प्रारंभ एवं बंदी आवश्यकतानुसार किया जाता है।

शिक्षा के क्षेत्र में आश्रम के योगदान को देखते हुए इसे साहित्य तैयार करने तथा प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए जिला संसाधन केन्द्र के रूप में निरूपित किया गया।

आश्रम ने बालकों तथा बालिकाओं के लिए तीन-तीन छात्रावास आश्रम परिसर, तुर्रा एवं दुध्दी नगर में स्थापित किए हैं। छात्रावास के अंत:वासी अपने व्यय का वहन स्वयं करते हैं, परंतु बालिकाओं को प्रोत्साहन के रूप में पुस्तकें दी जाती हैं।

बनवासी सेवा आश्रम अपने परिसर में एक हाईस्कूल, ग्राम निर्माण केन्द्रों पर पांच जूनियर हाईस्कूल तथा एक प्राथमिक विद्यालय का संचालन करता है। इन शिक्षण केन्द्रों के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय तथा अंर्तराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में भागीदारी की है।

पूर्व की तुलना में अभिभावक अब बच्चों की शिक्षा के बारे में सचेत हो गए हैं। शासकीय विद्यालय नियमित हो गए हैं। कुछ अन्य संस्थाएं भी विद्यालय चला रही हैं। लेकिन अभी भी ऐसे कई स्थान हैं जहां विद्यालय नहीं हैं। आश्रम इन स्थानों पर लाभार्थियों के अंशदान के आधार पर विद्यालय प्रारंभ करने के बारे में विचार कर रहा है।

किशोर बालक एवं बालिकाओं के बीच बेहतर समझ विकसित करने के लिए आश्रम प्रतिवर्ष छ: या सात कैम्पों का आयोजन करता है।

शिक्षा कार्यक्रम को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्ािान तथा बाल विज्ञान कांग्रेस से संबध्द किया जा चुका है।