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पर्यावरण स्वास्थ्य संरक्षण

 
 
  सिंगरौली सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन का एक दृश्य. पॉवर स्टेशनों तथा अन्य कारकों के कारण हर बीतते दिन के साथ पर्यावारणीय प्रदूषण बढ़ता जा रह है

पर्यावरणीय प्रदूषण नियंत्रण एक नया मुद्दा है। ओबरा तथा म्योरपुर विकास खण्ड में पंत सागर के इर्द गिर्द पांच सुपर थर्मल बिजलीघर हैं। इसके अलावा हिन्डालको तथा कनोडिया के अपने बिजलीघर हैं। इन बिजलीघरों के पास ही कोयले की खदानें हैं। ओबरा के निकट डाला में पत्थर क्रशर हैं। उत्पादन तथा ढुलाई के कारण हर बीतते दिन के साथ पर्यावरणीय प्रदूषण बढ़ता जा रहा है।

कोयले के जलने के कारण वातावरण में पारे की मात्रा बढ़ती जा रही है तथा यह जल, वनस्पति तथा हवा को प्रदूषित कर रहा है। क्लोरीन, फ्लोरी, सल्फर डाईआक्साइड तथा नाइट्रोजन आक्साइड, इत्यादि, भी प्रदूषण को बढ़ा रहे हैं जिसका प्रभाव न केवल औद्योगिक नगरियों के आस पास रहने वाले लोगों पर दिखाई पड़ रहा है बल्कि जल, मृदा तथा फसलों पर भी दिख रहा है।

प्रदूषण का प्रभाव पंत सागर के दक्षिणी तथा पूर्वी भागों पर अधिक है। डाला सीमेन्ट फैक्ट्री पिछले कुछ वर्षों से बंद पड़ी है और इसलिए पास पड़ोस में कुछ हरियाली दिखाई देती है। लेकिन कुछ दूर पर क्रशर क्षेत्र में भारी प्रदूषण है। सरकार उन्हें कभी चालू करने देती है और कभी बंद कर देती है। ग्रामवासी तथा सड़क उपयोगकर्ता प्रभावित होते हैं। क्षेत्र में फसलें नहीं उगाई जा रही हैं।

दिसंबर 1996 में आश्रम ने एक कार्यशाला आयोजित की जिसमें हर उद्योग के प्रतिनिधि ने अपने उत्पादन के तरीके, प्रदूषक तथा उनके नियंत्रण की जानकारी दी। लोगों ने भी अपने अनुभवों का आदान प्रदान किया कि किस प्रकार उनकी फसलें तथा उनके शरीर बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। इसके तत्काल बाद आश्रम ने फसल उत्पादन पर एक सर्वेक्षण किया। इससे लोगों में जागरूकता बढ़ी। पर्यावरणीय प्रदूषण पर प्रश्न किए गए तथा इन प्रश्नों ने उद्योगों को प्रभावित किया।

पर्यावरणीय प्रदूषण का अनुश्रवण करने के लिए आश्रम ने जल तथा वायु की गुणवत्ता का अनुश्रवण दो पी एच डी विद्यार्थियों की सहायता से प्रारंभ किया। जनवरी 1999 में इसने अपने परिसर में एक छोटी प्रयोगशाला स्थापित की। आंकड़ों को समाज, जिला प्रशासन, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा उद्योगों के बांटा जाता है। पर्यावरणीय प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगातार दबाव बनाने के प्रयास जारी हैं।

जनवरी 2002 से आश्रम केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहायता से पर्यावरणीय प्रदूषण मापने की एक परियोजना का क्रियान्वन कर रहा है।