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स्वास्थ्य तथा चिकित्सा

 
 
  (ऊपर) एक स्वस्थ्य केंद्र पर रोगी, तथा (नीचे) आँख के ऑपरेशन कैंप के बाद रोगी
 

बनवासी सेवा आश्रम की स्थापना के बाद क्षेत्र में फैली बीमारी सवैया के उपचार के लिए एक बड़ा अभियान चलाया गया।

वर्ष 1968 में स्वास्थ्य तथा चिकित्सा संबंधित कार्य को सुनियोजित गतिविधि के रूप में प्रारंभ किया गया। चार-बिन्दु की कार्य योजना थी:

  1. ग्रामीण समुदाय के स्वास्थ्य में सुधार तथा उसका संरक्षण
  2. स्वास्थ्य तथा चिकित्सा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए स्थानीय लोगों का प्रशिक्षण
  3. छोटे तथा नियोजित परिवार के लिए जागरूकता प्रसार
  4. घरेलू औषधियों का प्रचार प्रसार

चिकित्सा तथा स्वास्थ्य के लिए एक वृहत संरचना का सृजन किया गया है:

  1. ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य कार्यकर्ता
  2. आश्रम के ग्राम निर्माण केन्द्रों पर स्वास्थ्य तथा प्राथमिक उपचार केन्द्रों की स्थापना
  3. आश्रम स्तर पर स्वास्थ्य शिक्षण, उपचार तथा चिकित्सा केन्द्र
  4. गंभीर रोगियों तथा विशेष बीमारियों के लिए समीप के सुसज्जित अस्पतालों में रेफरल

स्वास्थ्य तथा प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रों की स्थापना ग्राम निर्माण केन्द्रों के स्तर पर की गई है। इन केन्द्रों में आश्रम द्वारा प्रशिक्षित चिकित्सक प्रात: काल बैठते हैं तथा बाद में यही चिकित्सक गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता का प्रचार प्रसार करने जाते हैं।

आश्रम मुख्यालय पर एग्रीण्डस अस्पताल की स्थापना की गई है। इस अस्पताल में न केवल सोनभद्र जिले से बल्कि पड़ोसी राज्यों झारखण्ड तथा छत्तीसगढ़ के लगे हुए जिलों से भी रोगी आते हैं। इस अस्पताल में एक छोटी पैथोलोजी प्रयोगशाला तथा भर्ती की भी सुविधा है।

यह अस्पताल स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं छोटे स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण प्रदान करता है। यह पोस्टर, फोल्डर तथा पुस्तिकाओं जैसी सामग्री का भी प्रकाशन करता है ताकि स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सके।

यह स्पष्ट है कि नई उभरती हुई बीमारियों का वैयक्तिक स्तर पर नियंत्रण संभव नहीं है। समाज को अपने वातावरण पर विचार करना होगा, विकास के आयामों को समझना होगा तथा एक स्वस्थ जीवन को विकसित करना होगा। यह स्वास्थ्य शिक्षण का एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।