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| ग्रामस्वराज्य संगठन - जन संगठन | जागरूकता प्रसार | जल संरक्षण, सिंचाई तथा भूमि सुधार | कृषि, औद्यानिकी तथा वानिकी | पशुपालन | खादी तथा ग्रामोद्योग | बच्चों के लिए शिक्षा | स्वास्थ्य तथा चिकित्सा | महिला सशक्तीकरण | ग्रामीण हकदारी तथा कानूनी सहयोग | पर्यावरण स्वास्थ्य संरक्षण |
 
ग्रामस्वराज्य संगठन - जन संगठन
 
 
  (ऊपर) अक्षर सेना सम्मलेन में ग्रामस्वराज्य संगठन के प्रतिनिधि, तथा (नीचे) संगठन प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण का एक दृश्य
 

ग्रामस्वराज्य संगठन का उद्देश्य है एक ऐसी संस्कृति का विकास करना जिसमें ग्रामीण समुदाय अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए आत्म निर्भर बन सके, आपसी सहयोग से जीवन यापन कर सके, ग्राम के संसाधनों की देखरेख कर सके, सभी व्यक्तियों के पक्ष में कार्य करे तथा शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसे मुद्दों के बारे में सोच सके।

ग्रामस्वराज्य संगठन सभी के लिए विकास सुनिश्चित करने के लिए तथा आत्म विश्वास बढ़ाने के लिए जन संगठन हैं। त्रि-स्तरीय प्रणाली का विकास किया गया है:

  • प्रथम स्तर: ग्रामस्वराज्य सभा। इसमें गांव के सभी परिवारों की सदस्यता होती है।
  • द्वितीय स्तर: क्षेत्रीय ग्रामस्वराज्य सभा। इसमें संकुल स्तर पर ग्राम निर्माण केन्द्र से सेवित सभी गांवों की ग्रामस्वराज्य सभा के प्रतिनिधि होते हैं तथा इसमें आश्रम का भी प्रतिनिधि होता है।
  • तृतीय स्तर: केन्द्रीय ग्रामस्वराज्य सभा। इसमें क्षेत्रीय ग्राम स्वराज्य सभा तथा आश्रम के प्रतिनिधि होते हैं।

सोनभद्र एक पहाड़ी क्षेत्र है तथा यहां बस्तियां काफी छितरी हुई हैं। हर एक के लिए यह संभव नहीं है कि वह राजस्व गांव या पंचायत स्तर पर एकत्र हो सके। इसीलिए इन छितरी हुई बस्तियों में अलग-अलग ग्रामस्वराज्य सभाओं का गठन किया गया है। मार्च 2003 तक 134 ग्राम पंचायतों के 230 गांवों में 431 ग्रामस्वराज्य सभाओं का गठन किया गया था। ये सभाएं 25 ग्राम निर्माण केन्द्रों से संबंधित हैं।

ग्रामस्वराज्य सभाएं ग्राम सुधारों, विवादों के निपटारे, विकास कार्यों आदि के लिए पंचायतों के साथ मिलकर कार्य करती हैं। आवश्यकतानुसार आश्रम केन्द्र की सहायता लेता है। आश्रम के कार्यकर्ता ग्रामस्वराज्य सभाओं से ग्रामस्वराज्य के अभिप्रेरण के लिए लगातार संपर्क में रहते हैं तथा आश्रम की योजनाओं के निर्माण तथा उनके क्रियान्वन में व्यस्त रहते हैं।

ग्रामस्वराज्य संगठन ने भूअभिलेखों के सुधार के लंबे संघर्ष में महत्पूर्ण भूमिका निभाई है तथा लोक अदालतों में लंबित 50,000 विवादों के निपटारे में योगदान दिया है। इसने भ्रष्टाचार, शराबबन्दी, महिलाओं के उत्पीड़न पर कार्यवाही तथा विवादों के आपसी समाधानों पर पहलें की हैं।

पांच से सात ग्रामस्वराज्य सभाओं को मिलाकर विकास मंचों का गठन किया गया है। इन मंचों ने लोगों की समझ बढ़ाई है ताकि वे विकास का मुद्दो सिंगरौली क्षेत्र विकास प्राधिकरण तथा स्थानीय पंचायतों में प्रभावी ढंग से उठा सकें।

ग्रामस्वराज्य सभा के सदस्यों के लिए लेखा प्रशिक्षण कैम्पों का आयोजन किया गया है। ये कैम्प इसके सदस्यों तथा आश्रम कार्यकर्ताओं के लिए आयोजित किए गए हैं ताकि दैनिक जीवन, वर्तमान सामाजिक समस्याओं तथा सामाजिक-आर्थिक विकास के बारे में वे ग्रामस्वराज्य के विचारों एवं अनुभवों को समझ सकें।

ग्राम सभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा रहा है। आठ ग्रामस्वराज्य सभाओं में महिला सदस्य हैं, 10 की अध्यक्ष महिलाएं हैं तथा पांच की सचिव महिलाएं हैं। महिलाओं का एक स्वतंत्र नेतृत्व है जिसका लोग आदर करते हैं तथा उसका सहयोग करते हैं।

क्षेत्रीय ग्रामस्वराज्य सभाएं ग्राम विकास कार्यक्रम के क्रियान्वन, कृषि, ग्रामोद्योग, बाजारीकरण, पर्यावरणीय प्रदूषण, आदि, पर चर्चाएं करती हैं। उन्हें अपना बजट बनाने तथा क्षेत्रीय ग्राम कोष बनाने के बारे में समझाया जा चुका है। अन्य मुद्दे जैसे बहुराष्ट्रीय कम्पनियां, बाजारीकरण, सामाजिक न्याय, आदि, पर भी चर्चा की जा रही है।

ग्रामस्वराज्य कोष

यह चक्रीय ग्राम निर्माण कोष है जिसका उपयोग संगठन अपनी गतिविधियों के लिए करता है तथा विकासात्मक योजनाओं के क्रियान्वन के लिए भी जिम्मेवारी उठाता है। ग्राम निर्माण कोष के गठन के लिए मुख्य उद्देश्य है ग्रामवासियों को आवश्यकता के समय धन उपलब्ध कराना। लाभ लेने के बाद इसकी वापसी करनी होती है। कोष का प्रबंधन ग्रामस्वराज्य सभा द्वारा किया जाता है।

ग्राम कोष के अतिरिक्त एक अन्य केन्द्रीय ग्राम कोष का भी सृजन किया गया है जिसमें विभिन्न आर्थिक विकास कार्यक्रमों के लाभार्थियों से प्राप्त धन को जमा किया जाता है। इस कोष से ग्रामवासियों को आर्थिक विकास एवं ऋण अदायगी के लिए वापसी के आधार पर धन उपलब्ध कराया जाता है। इससे वे बाहरी धन पर कम निर्भर होते हैं। किए गए हर व्यय का लेखा रखा जाता है तथा उसका आडिट भी कराया जाता है। केन्द्रीय ग्राम कोष का उपयोग बीज तथा उर्वरकों
बैलों के लिए ऋण, स्वरोजगार, ऋण अदायगी तथा ग्राम निर्माण कार्यकर्ता एवं अन्य कार्यालय व्यय के लिए किया जाता है।