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जल संरक्षण, सिंचाई तथा भूमि सुधार
 
 
  (ऊपर) ग्रामवासी एक जल संग्रहण संरचना के लिए मिटटी खोदते हुए, तथा (नीचे) जल से भरी ऐसी के संरचना
 

अपनी स्थापना के समय से आश्रम ने सिंचाई पर काफी जोर दिया है। वर्ष 1969 से 1975 तक 'कार्य के बदले गल्ला' परियोजन के अंर्तगत बड़े पैमाने पर भूमि सुधार तथा बंधीकरण का कार्य किया गया। इस परियोजना से 800 किसानों को लाभ मिला, 1,200 एकड़ भूमि को सुधारा गया तथा 30 सामूहिक बंधी तथा 350 छोटी बंधियों का निर्माण किया गया। इससे जल उपलब्ध हो सका तथा निचले क्षेत्रों में धान की खेती प्रारंभ हो सकी। इस परियोजना का एक और लाभ यह रहा कि लोगों को दिक्कतों वाले दिनों में काम मिल सका। इससे लोग महाजनों के चंगुल से निकल सके तथा शोषण में कमी आई। वर्ष 1979-80 के अकाल में आश्रम ने बंधीकरण तथा कुंए खोदने का कार्य प्रारंभ किया तथा इससे स्थानीय लोगों को राहत प्राप्त हुई। आश्रम ने सरकार को अभिप्रेरित किया कि वह इस कार्य को बड़े पैमाने पर करे तथा सरकार की मानचित्र बनाने में भी सहायता की।

इस कार्य से ग्रामवासियों में उत्साह का संचार हुआ। बाद में अन्य विभिन्न योजनाओं की सहायता से इस कार्य का प्रसार करा गया। 1975 के बाद 105 सामूहिक तथा 926 छोटी बंधियों का निर्माण किया गया। कुल 23,186 एकड़ भूमि का सुधार किया गया। रहट, बावली तथा पम्पों से सिंचाई की गई। औसतन प्रति बावली 4 एकड़ की सिंचाई की गई तथा इससे औसतन तीन किसानों को लाभ मिला।

इस परियोजना का एक पहलू था जल के स्रोत के निकट पाइप टावर का विकास। इस पाइप टावर में पानी को सिंचाई के लिए ऊंची भूमि में पम्प किया जाता था। वर्ष 200 तक 369 पाइप टावर का निर्माण किया गया। इससे क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था का विस्तार हो सका। सरकार ने 150 पाइप टावरों का निर्माण किया तथा पंचायतों ने भी इस कार्य को प्रारंभ किया।

वर्ष 1975 से 1985 तक आश्रम ने इस सिंचाई परियोजना की लागत वहन की। वर्ष 1986 में निर्णय लिया गया कि लाभार्थी परिवार लागत का 50 प्रतिशत वहन करेंगे। शुरुआत से ही लाभार्थियों से अपेक्षा की गई थी कि वे परियोजना में श्रम के रूप में योगदान करेंगे तथा उनके कार्य के अनुरूप उन्हें भुगतान किया जाएगा। वर्ष 1986 में श्रम बैंक योजना का प्रारंभ किया गया। इस योजना के अंर्तगत लाभार्थियों को अपने तथा अपने सहायक के श्रम का 50 प्रतिशत भुगतान किया जाना था। यह अपेक्षा की गई थी कि लाभार्थी अपने सहायक को वस्तु के रूप में भुगतान करेगा या फिर यदि यह संभव नहीं हुआ तो नकद। इसके बाद यह परंपरा बन गई है।

कुछ वर्ष पूर्व आश्रम ने कृषि विकास योजना के अंर्तगत एक अन्य कार्यक्रम प्रारंभ किया है। 210 किसानों के पास 269 एकड़ असिंचित तथा अनुपजाउ भूमि थी। इस भूमि का उपयोग करने के लिए भूमि सुधार कार्य तथा बंधीकरण्ा किया गया। सैकड़ों किसानों ने श्रमदान किया तथा आश्रम से बिना किसी सहायता के कार्य किया। अधिकतर लोगों ने इस भूमि पर खेती प्रारंभ की तथा कुछ ने पौधरोपण किया। आशा की जाती है कि और लोग इस प्रकार का कार्य करेंगे।