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महिला सशक्तीकरण

 
 
  (ऊपर तथा नीचे) समूहों के मेले का एक दृश्य
 

महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम की शुरुआत 1968 में साप्ताहिक मजदूरी भुगतान के दिनों से हुई थी। जब कभी प्रेमभाई की मां तथा मौसी आश्रम आती थीं तब महिला जागरूकता कैम्प दूरस्थ गांवों में आयोजित किए जाते थे। पहले लोग डरते थे तथा महिलाओं के साथ पुरुष भी आते थे। लेकिन जब उनमें आत्मविश्वास आया तो ऐसे और कैम्पों की मांग उठने लगी। लेकिन कार्य 1989 तक बाधित रहा क्योंकि आश्रम में महिला कार्यकर्ता नहीं थीं।

वर्ष 1989 में महिला छात्रावास प्रारंभ किया गया ताकि समस्याओं में ग्रसित महिलाएं व्यावसायिक दक्षता प्राप्त कर सकें। इसी वर्ष महिलाओं के लिए एक नेतृत्व विकास कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। अधिकतर प्रतिभागी महिलाएं निरक्षर थीं तथा बच्चों के साथ आई थीं। लेकिन इन अवरोधों के बावजूद यह सक बड़ा सीख का अनुभव था।

एक साल बाद 1990 में भारत सरकार के सहयोग से महिला समाख्या कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। इस कार्यक्रम को तीन विकास खण्डों के 10 गांवों में चला। एक महीने के प्रशिक्षण सत्र में महिलाओं ने समूह में बैठना, सुनना, साक्षरता की दक्षता, गाने सुनना, पोषण, सिलाई, स्टोव तथा लालटेन जलाना, कृषि पध्दतियां, पारिवारिक संस्कृति, आदि, को सीखा। हांलाकि यह एक अल्प अवधि का कार्यक्रम था, आश्रम महिलाओं से ग्राम सखियों के माध्यम से जुड़ सका।

अब तक चले कार्यक्रम के मुख्य बिन्दु रहे हैं:

  1. जागरूकता तथा व्यक्तित्व विकास
  2. महिलाओं की पारिवारिक, सामाजिक तथा आर्थिक क्षमताएं
  3. पंचायती राज में महिलाओं की भागीदारी
  4. महिलाओं का स्वास्थ्य तथा घरेलू उपचार
  5. स्वयं सहायता समूहों का गठन

अब पुरुष महिला विकास कार्यक्रमों में सहयोग कर रहे हैं तथा इसके बहुत अच्छे परिणाम हैं। महिलाएं अब विश्वास से भरी हुई हैं।