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प्रकाशन

 
 

मानव और सृष्टि का नाता

रागिणी बहन द्वारा लिखी गई मानव और सृष्टि का नाता नाम की यह पुस्तक मानव के प्रकृति से संबंध की व्याख्या करती है। मानव प्रकृति की रचना है तथा इसने प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग अपने लाभों के लिए किया है। लेकिन आन मानव धरती के संसाधनों का उपयोग न केवल अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कर रहा है, बल्कि संसाधनों का उपयोग अपने लालच की पूर्ति के लिए कर रहा है जिससे पर्यावरण को नुकसान पंहुच रहा है।

औद्योगीकरण, मानव के स्थान पर मशीनों का उपयोग, बड़ी मात्रा में ऊर्जा की खपत तथा विज्ञान एवं तकनीके में प्रगति से पर्यावरण पर ऋणात्मक प्रभाव पड़ रहा है। सोनभद्र जिला इसका ज्वलंत उदाहरण है। यहां रिहन्द बांध का निर्माण बिजली बनाने के लिए किया गया। इस बांध के निर्माण के कारण काफी सारी कृषि एवं वन भूमि नष्ट हो गई। बांध से बिजली उत्पादन एवं तापीय बिजली घरों से क्षेत्र का अनियंत्रित औद्योगीकरण हुआ, जिससे पर्यावरण प्रदूषण भी हुआ।

प्रकृति को हुए नुकसान से लड़ने के लिए यह पुस्तक एक सरल, सहयोगात्मक, कृषि आधारित जीवन की वकालत करती है। यह जोर देती है कि शिक्षा को लोगों को प्रकृति के निकट लाना चाहिए न कि उसे नष्ट करना चाहिए।

     

     

 

 

जिसको ज्ञान उसको मान

वर्ष 1991 की जनगणना के अनुसार भारत में 48 करोड़ निरक्षर थे। इन लोगों को शिक्षित करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी शैक्षणिक अभियान चलाया गया। उततर प्रदेश ने इस कार्यक्रम में सक्रियता से भाग लिया तथा उत्तर प्रदेश में बनवासी सेवा आश्रम का योगदान भली भांति ज्ञात है।

साने गुरुजी द्वारा रचित जिसको ज्ञान उसका मान कार्यक्रम के लिए प्रकाशित संक्षिप्त कहानियों का संग्रह है। यह कहानियां मानव के जीवन में शिक्षा के महत्व पर जोर देती हैं। ये कहानियां सेवादल के युवा सेवकों द्वारा किए गए कार्य पर भी प्रकाश डालती हैं। इन सेवकों ने गांव गांव की यात्रा लोगों को शिक्षित करने तथा उनकी समस्याओं का निदान करने के लिए की थीं।

इस पुस्तक में छ: कहानियां हैं:

  • पैदाल की रानी
  • डर भगाने वाला मंत्र
  • जिसको ज्ञान, उसका मान
  • मनुष्य बनने के लिए पढ़ो
  • मंडी की आंख
  • ज्ञान ही सच्ची ज्योति
     

     

 

 

स्वास्थ्य तथा विकास

हनुमान प्रसाद द्वारा लिखी गई पुस्तक स्वास्थ्य तथा विकास स्वास्थ्य तथा विकास संबंधी समस्याओं पर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के 13 गांवों में गांधी अध्ययन संस्थान के लिए बनवासी सेवा आश्रम द्वारा किए गए अध्ययन की रपट है।

स्वास्थ्य तथा विकास एक उपचारात्मक सर्वेक्षण है जो बीमारी का सामाजिक-आर्थिक दशा से संबंध स्थापित करता है तथा बताता है कि किस प्रकार वर्तमान में उपलब्ध सेवाएं क्षेत्र की सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा चिकित्सा आवश्यकताओं से कम हैं। सर्वेक्षण ग्रामीण विकास की किसी योजना के लिए ऐसी सेवाओं को कसौटी के पत्थर के रूप में देखता है तथा इंगित करता है कि किस प्रकार ये सेवाएं आर्थिक विकास की योजनाओं में योगदान दे सकती हैं। अध्ययन खोज के एक नए क्षेत्र के बारे में बात करता है। दुर्भाग्यवश सामाजिक-आर्थिक नियोजन के बढ़ते हुए साहित्य में इस क्षेत्र पर जोर नहीं दिया गया है।

     

     

 

परिवार सुख कैसे

हर बीतते दिन के साथ भारत की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। इससे नौकरियों, भोजन, कपड़े, आवास तथा स्वास्थ्य सेवाओं की मांग बढ़ रही है। लेकिन वर्तमान आर्थिक स्थिति में हर एक के लिए जीवन की इन मूल आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाना संभव नहीं है। तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या को रोकने के लिए सरकार ने कई जागरूकता अभियान चलाए हैं लेकिन जनसंख्या बिना रोक टोक के बढ़ती चली जा रही है।

डा रागिणी बहन जो कई वर्षों से सामाजिक कार्य कर रही हैं ने इस पुस्तक को लिख कर इस मामले में योगदान दिया है। यह पुस्तक जनसंख्या वृध्दि को रोकने के लिए बहुत वैज्ञानिक तरीका प्रस्तुत करती है। चित्रों, रेखा चित्रों तथा आसानी से समझ में आने वाली भाषा की सहायता से उन्होंने विधियां तथा सलाह दी है। यदि यह पुस्तक नवविवाहित पढ़ें तो उनका जीवन सरल हो जाएगा तथा वे एक प्रकार से राष्ट्र की प्रगति में योगदान देंगे।

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