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प्रकाशन
 

 

पंचायत राज क्यों?

इस पुस्तक के द्वारा रागिणी बहन ने स्थानीय स्तर पर पंचायतों के महत्व पर जोर दिया है। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार, अमीर-गरीब के बीच की खाई तथा संसाधनों का असमान वितरण अभिशासन के केन्द्रीयकरण तथा लोगों से दूरी के कारण हैं। पंचायत राज इस अभिशासन का विकेन्द्रीकरण करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि स्थानीय लोग अभिशासन को अपने हाथों में ले लेते हैं।

जब केन्द्रीय सरकार कानून बनाती है तो यह ऐसा राष्ट्र के विकास के लिए विहंगम दृष्टि से करती है। लेकिन चूंकि केन्द्रीय सरकार लोगों के निकट नहीं होती है इसलिए यह बहुधा अपने कानूनों के विशेष रूप से ग्राम स्तर पर सामाजिक परिणामों को नहीं जानती है। इन कानूनों से परे पंचायतें लोगों की आवश्यकताओं को केन्द्रीय सरकार की तुलना में बेहतर ढंग से संबोधित कर पाती हैं तथा इस प्रकार वे गांवों में परिवर्तन का उत्प्रेरक बन जाती हैं।

     

     

 

तरुण मां की करुण गाथा

साने गुरुजी द्वारा लिख पुस्तक तरुण मां की करुण गाथा शराबबंदी पर लघु कथाओं का संग्रह है। इस पुस्तक के द्वारा लेखक लोगों को शराब की बुराइयों तथा शराबबंदी पर शिक्षित करना चाहते हैं। रोजाना शराब पर करोड़ों रुपए खर्च होते हैं तथा यह बदले में लोगों तथा उनके परिवारों का जीवन नष्ट कर देती है। यह एक प्रयास है जिसके माध्यम से लोगों का जीवन इस बुराई से बचाया जा सकता है। पुस्तक में दी गई कहानियां महाराष्ट्र में करे गए शराबबंदी कार्य से प्रेरित हैं।

इस पुस्तक में नशाखोरों की दुर्दशा तथा उनकी दिन प्रतिदिन समस्याओं के बारे में पांच कहानियां हैं। इस पुस्तक में उदाहरण दिए गए हैं जहां पर संपन्न लोग शराब का शिकार होकर अपना जीवन नष्ट कर बैठे। ये कहानियां इन शराबखोरों से संबंधित महिलाओं की दुर्दशा का भी वर्णन करती हैं कि किस प्रकार उनका उत्पीड़न उनके पति करते रहे तथा उन्हें मिलों में काम करने के लिए मजबूर किया गया तथा उनकी मजदूरी शराब पर लुटा दी गई। कहानियां हैं:

  • उदार आनन्दराव
  • सीता का दुर्भाग्य
  • तारक देवता
  • सावित्री का सुका
  • मोडे गांव की कहानी
     

     

 

 

आरोग्य का आधार

हर कोई जानता है कि वायु, जल, भोजन, कपड़े तथा आवास हमारे जीवन के लिए आवश्यक वस्तुएं हैं। हर कोई जानता है कि हर एक व्यक्ति को इन वस्तुओं को प्राप्त करने के लिए कड़ा परिश्रम करना होता है। लोगों को ये वस्तुएं प्रदान करने के लिए सरकार तथा अंर्तराष्ट्रीय संगठन भी सहायता करते हैं। लेकिन इन प्रयासों के बावजूद बहुत सारे लोग बीमारियों से भरा अस्वस्थ जीवन व्यतीत करते हैं।

डा रागिणी बहन द्वारा लिखित यह पुस्तक उनके द्वारा इस पुस्तक के पाठकों के लिए एक स्वस्थ जीवन बिताने की आदत डालने का प्रयास है। यह पुस्तक स्वास्थ्य तथा उपचार के लिए पुरानी आदतों एवं प्रथाओं को आधुनिक विज्ञान के साथ संबध्द करती है तथा पाठकों के लिए एक नए परिदृश्य का निर्माण करती है।

     

     

 

 

गांधीवादी आन्दोलन पर एक दृष्टि: पूर्वोत्तर भारत में पांच ग्राम विकास संगठन

गांधीवादी आन्दोलन तथा पांच ग्राम विकास संगठनों के बारे में पाल क्लीमेन्ट्स द्वारा यह अध्ययन एक खोजी रपट है। गांधीवादी आन्दोलन भारत में जीवित है तथा ग्रामीण निर्धनों के हितों के लिए कार्यरत है ताकि एक विकेन्द्रीकृत आत्मनिर्भर एवं उचित सामाजिक ढांचा बनाया जा सके।

ग्रामीण विकास परियोजनाओं का एक नेटवर्क आर्थिक तथा दक्षता आत्मनिर्भरता के लिए कार्यरत है ताकि ग्राम संगठन बन सकें, उचित तकनीकी लाई जा सके, नैतिक आदर्शों का प्रयार किया जा सके एवं अत्याचार एवं अन्याय के विभिन्न रूपों के विरुध्द संघर्ष किया जा सके। ये संगठन गांधीवादी तरीके से अपने ही सिध्दान्तों की संरचना करने रहे हैं, उनका परिमार्जन कर रहे हैं ताकि आगे के बारे में सोचा जा सके। आन्दोलन भारत की सामाजिक संरचना में गहरे तक बैठा है तथा इसे प्रभावित कर रहा है एवं इससे प्रभावित हो रहा है। यह भारत की कुछ बहुत गंभीर समस्याओं का समाधान प्रदान कर रहा है।

यह पत्र उपरोक्त अनुच्छेद में प्रस्तुत तथ्यों को स्पष्ट करने तथा उनका समर्थन एवं खोजने का प्रयास है। लेखक ने पांच ग्रामीण विकास परियोजनाओं को लिया है जो किसी न किसी तरह से गांधीवादी आन्दोलन से जुड़ा है तथा यह आन्दोलन को एक दृष्टि से देखने के साथ ही साथ उन सभी मुद्दों का अन्वेषण करता है जो कि किसी भी ग्रामीण विकास की परियोजनाओं से जुड़े होते हैं। लेखक इस बात पर जोर देता है कि किस प्रकार परियोजनाएं नितांत निर्धनता एवं अत्याचार को संबोधित करती हैं तथा किस प्रकार वे देश तथा विदेश से कम संबध्द होती हैं।

सामान्य तौर पर लेखक ने गांधीवादी आन्दोलन तथा भारत में ग्रामीण विकास पर एक परिदृश्य का निर्माण किया है। यह उनका मूल्यांकन नहीं करता है बल्कि कुछ मुद्दों का विश्लेषण करता है। लेखक आशा करता है कि पाठकों को एक सहायक तथा सतत ढांचा प्राप्त होगा।

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